GST News: 3 Percent GST On Selling Old Jewelry

पुरानी ज्वैलरी बेचने पर 3% GST, रिपेयरिंग करवाई तो चार्ज पर 5% टैक्स

नई दिल्ली.पुरानी ज्वैलरी या सोना-चांदी बेचने पर 3% जीएसटी लगेगा, लेकिन पुरानी ज्वैलरी देकर कोई नई ज्वैलरी लेता है तो नए गहनों पर लगने वाले टैक्स में वह एडजस्ट हो जाएगा। रेवेन्यू सेक्रेटरी हसमुख अढिया ने बुधवार को ‘जीएसटी मास्टर क्लास’ में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक, कारोबारी को अकाउंट का रिकॉर्ड 6 साल तक रखना पड़ेगा, लेकिन अगर कोई केस चल रहा है तो उसके खत्म होने तक रिकॉर्ड रखना होगा। रिवर्स चार्ज में 3% जीएसटी…
– अढिया के मुताबिक, “मान लीजिए मैं ज्वैलर हूं। कोई मेरे पास पुराने गहने लेकर आता है, यह सोना खरीदने के समान है। ज्वैलर किसी शख्स से पुराने गहने खरीदता है तो वह रिवर्स चार्ज में 3% जीएसटी लेगा। यानी अगर ज्वैलरी एक लाख रु. की है तो उसमें से 3,000 रु. कट जाएंगे, लेकिन अगर कोई ज्वैलरी में कुछ बदलाव या रिपेयरिंग करवाता है तो उसे जॉब वर्क माना जाएगा। इस काम के लिए जितने पैसे लिए जाएंगे, उस पर 5% जीएसटी लगेगा।”
वेबसाइट विज्ञापन पर GST
– नेटफ्लिक्स पर मूवी या टीवी शो डाउनलोड करने पर कितना टैक्स लगेगा, यह पूछने पर अढिया ने बताया कि अमेरिकी कंपनी अभी तक सर्विस टैक्स दे रही थी। अब उस पर जीएसटी लगेगा।
– वेबसाइट या ब्लॉग पर विज्ञापनों के बारे में अढिया ने कहा कि अगर किसी सर्विस से पैसे की कमाई हो रही है तो उस पर जीएसटी लगेगा। हालांकि, इंडस्ट्री की राय लेने के बाद जल्दी ही इस बारे में क्लैरिफिकेशन जारी किया जाएगा।
– अढिया ने बताया कि जो कारोबारी कंपोजिशन में जाना चाहते हैं, वे 21 जुलाई तक जीएसटीएन पोर्टल पर लॉगइन करके इस ऑप्शन को चुन सकते हैं।
– नया रजिस्ट्रेशन कराने वालों को शुरू में ही यह ऑप्शन चुनना होगा। सालाना 75 लाख रुपए तक टर्नओवर वाले कारोबारी कंपोजिशन का विकल्प चुन सकते हैं।
– सर्विसेस में सिर्फ रेस्तरां कंपोजिशन में जा सकते हैं। इसमें ट्रेडर को पूरे टर्नओवर पर 1%, मैन्युफैक्चरर को 2% और रेस्तरां को 5% टैक्स देना होगा।
GST के खिलाफ हड़ताल, टेक्सटाइल इंडस्ट्री को 40 हजार करोड़ का नुकसान
– जीएसटी के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन और एक जुलाई से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल से कपड़े के कारोबार को अब तक 30 से 40 हजार करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका है। अकेले गुजरात को 10 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।
– टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लाखों कारोबारी कपड़े को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने अपनी हड़ताल खत्म करने के लिए या तो सिर्फ धागे पर टैक्स लगाने या फिर कपड़े पर जीएसटी को एक अप्रैल 2019 तक टालने की मांग की है।
– बता दें कि देश में कपड़ा कारोबार के प्रमुख केंद्र सूरत में टेक्सटाइल बचाओ संघर्ष समिति हड़ताल की अगुआई कर रही है।
– इसके संयोजक ने बुधवार को यह जानकारी दी।
गुजरात में 10 हजार करोड़ का नुकसान
– टेक्सटाइल बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक ताराचंद कसाट देवकिशन मंगाणी के मुताबिक, “गुजरात के सूरत, अहमदाबाद, राजकोट, जेतपुर, जामनगर, कच्छ आदि में पांच से सात लाख कपड़ा कारोबारी हैं। इनसे सीधे या परोक्ष तौर पर लाखों लोग जुड़े हैं। राज्य में कपड़ा कारोबारियों को अब तक करीब 10 हजार करोड़ रु. का नुकसान हो चुका है। कच्चे माल से जुडे उद्योगों, परिवहन आदि को मिलाकर यह नुकसान 15 हजार करोड़ तक पहुंच गया है।”
– देशभर में तमिलनाडु के इरोड के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना आदि में भी हड़ताल से अब तक कुल मिलाकर 30 से 40 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
– कपड़ा कारोबार में जीएसटी के चलते स्टॉक कम करने से 15 जून से ही बिक्री में गिरावट आनी शुरू हो गई थी।

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